निफ्ट जोधपुर में आयोजित संवाद सत्र में बोले लिटरेचर एक्टिविस्ट मनोज कुमार
भारतीय फैशन और साहित्य दोनों ही सृजनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम
जोधपुर। वैश्विक बाजार में भारतीय फैशन के लिए बडी संभावनाएं है, हम सभी को पारंपरिक पोशाकों को सुर्खियों में लाने की जरूरत है जिससे दुनिया को भारत की अनुठी सांस्कृतिक पहचान की जानकारी हो, यह कहना था लिटरेचर एक्टिविस्ट मनोज कुमार का, वे सोमवार को राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान में फैशन एवं साहित्य विषय पर आयोजित संवाद सत्र में बोल रहे थे। उन्होने कहा कि फैशन एवं साहित्य दोनों ही हमारी संस्कृति और समाज के प्रतिबिंब है। वे हमारे मूल्यों, विश्वासों और जीवनशैली को दर्शाते है। दोनों ही एक दूसरे से प्रभावित हो सकते है और एक दूसरे को प्रेरित भी कर सकते है। इस तरह दोनों सृजनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम है और हमें अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने का अवसर प्रदान करते है। लिखने की शुरूआत कैसे करें ऐसे एक स्टूडेन्ट के सवाल के जवाब में मनोज कुमार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कई बार युवा सोचने के बाद भी लिख नहीं पाते है, ऐसा होता है, लेकिन लिखने के लिए नियमित पढ़ना जरूरी है, चाहें आप हर दिन 5 मिनट ही स्वाध्याय करें। श्रीनाथजी के श्रंगार का जिक्र करते हुए मनोज कुमार ने स्टूडेन्ट्स को नियमित रूप से भगवान को पहनाये जाने वाली पोशाक के कलर, आभूषण की डिजाइन के बारे में अपने विचार रखें। इस दौरान चिंतक डॉ विपिन चंद्र, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ मनीष शुक्ला सहित स्टूडेन्ट्स मौजूद रहें।




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