श्रुतम्-1574
भारत की महान् सांस्कृतिक परंपराएं एवं विरासत-34
समुद्र मंथन का प्रतीकवाद:
▪︎ समुद्र मंथन मात्र एक मिथक नहीं है, अपितु गहरे दार्शनिक अर्थों वाली एक गहन कथा है। यह अच्छाई और बुराई, प्रकाश और अंधकार के बीच संघर्ष, नैतिक दुविधाओं और चुनौतियों एवं सृजन और विनाश के बीच ब्रह्मांड के निरंतर मंथन का प्रतिनिधित्व करता है। देवताओं और राक्षसों दोनों द्वारा मंथन किया गया समुद्र ब्रह्मांड और आध्यात्मिक विकास की प्रक्रिया का प्रतीक है।
▪︎ अमरता का अमृत- दिव्य ज्ञान, आध्यात्मिक ज्ञान और उस सत्य का प्रतीक है- जिसे व्यक्ति जीवन में खोजता है। यह मुक्ति प्रदान करने वाला अमृत है, जो मोक्ष के अंतिम लक्ष्य का प्रतीक है।
▪︎ अमृत के लिए युद्ध सकारात्मक और नकारात्मक शक्तियों, सद्गुणों और दुर्गुणों के बीच निरंतर मानवीय संघर्ष का प्रतीक है। यह नैतिक दुविधाओं और चुनौतियों को भी रेखांकित करता है, जिन्हें आध्यात्मिक जागृति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।
▪︎ चारों कुंभ मेला स्थलों पर गिरने वाली अमृत की बूंदें इन स्थानों पर प्रदत्त दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक हैं, जो उन्हें पवित्र और शक्तिशाली बनाती हैं। ये स्थान आध्यात्मिक गतिविधियों के जीवंत केंद्र बन गए हैं, जहाँ करोड़ों लोग अपनी आत्मा को शुद्ध करने और आध्यात्मिक कायाकल्प की खोज में एकत्र होते हैं।
▪︎ चारों कुंभ स्थल विशिष्ट आध्यात्मिक ऊर्जायुक्त हिन्दू आस्था और श्रद्धा के प्रमुख केंद्र हैं, जहां एक निश्चित अवधि में सम्पूर्ण हिन्दू समाज अपनी सांस्कृतिक व आध्यात्मिक शक्ति के उन्नयन हेतु संकल्पित होकर सामुहिक एकत्र होता है। जिससे राष्ट्रीय एकात्मकता, सामाजिक समरसता का भाव सहज ही पुष्ट होता है।

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