धर्म ग्रंथो में गार्गी मैत्रेयी लोपामुद्रा सावित्री जैसी विदुषियों का संदर्भ है
साहित्य परिषद द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर रेलमगरा के सादड़ी में महिला विषयक पुस्तक चर्चा का आयोजन
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद रेलमगरा खण्ड द्वारा शनिवार को सादड़ी ग्राम में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य परिषद के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री श्री मनोज कुमार उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्र सेविका समिति की उदयपुर विभाग सह कार्यवाहिका श्रीमती रुचि जी श्रीमाली ने विचार व्यक्त किए।
वक्ता रूचि ने भारत में प्राचीनकाल से अब तक महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय धर्म ग्रंथो में कहीं भी पुरुष व स्त्री में भेद नहीं किया गया है। जहां वैदिक काल में गार्गी मैत्रेयी जैसी महान दार्शनिक तथा लोपामुद्रा व सूर्य सावित्री जैसी विदुषी महिलाएं रही। वहीं रामायण काल में माता कैकई और सीता जी के पुरुषार्थी व्यक्तित्व की और भी ध्यान दिलाया।
उन्होंने बताया कि मध्यकाल में आक्रमण होने के उपरांत भी दक्षिण में रानी चेनम्मा, मध्य भारत में अहिल्याबाई होल्कर, रानी दुर्गावती, कर्णावती आदि वीर रानियों ने भारत में महिलाओं की सुदृढ़ स्थिति का परिचय दिया।
मुख्य वक्ता ने कहा कि आज पुनः भारतीय समाज नई करवट ले रहा है तथा अपने आप में सुधार करके सभी कुरीतियों को छोड़कर एक सशक्त समाज के रूप में उभर रहा है।
स्वाध्याय की बताई आवश्यकता-
भारत ज्ञान का भंडार रहा है और विपुल साहित्य सदैव से उपलब्ध रहा है। परंतु समाज में अध्ययन की प्रवृत्ति कम होने के कारण समाज विकृतियों में उलझता चला गया।
मुख्य वक्ता ने पुस्तकों के अध्ययन पर विशेष बल दिया और पुस्तक पठन के लिए कई सरल बिन्दु भी साझा किए। साथ ही महिला संबंधित भारतीय दृष्टि बताने के लिए महिला विषयक पुस्तकों की सूची एक वीडियो क्लिपिंग द्वारा बताई गई।
कार्यक्रम में रेलमगरा खण्ड की साहित्य परिषद की मातृशक्ति, विदुषी महिलाएं, विविध क्षेत्रों में कार्यरत समाज के प्रबुद्ध जनों की अच्छी संख्या में उपस्थिति रही।
इस अवसर पर रेलमगरा खण्ड संघचालक जगदीश चंद्र द्वारा वैचारिक, सामाजिक व धार्मिक
आदि पुस्तक की प्रदर्शनी द्वारा सभी को स्वरुचि अनुसार पुस्तक चयन कर उपहार स्वरूप प्रदान की गई व सभी का आभार प्रकट किया।



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