हमारे बारे में

विश्व संवाद केंद्र

हमारी धारणा

वर्तमान युग सूचना क्रांति का युग है। सूचना और संचार केवल व्यक्तित्व निर्माण ही नहीं, अपितु राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का भी अभिन्न अंग बन चुके हैं। ऐसे में एक ओर जहां भारतीय समाज को सशक्त सूचना तंत्र की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर पाश्चात्य सांस्कृतिक प्रभावों के कारण मूल भारतीय जीवन-मूल्यों पर खतरा भी बना हुआ है।

भारत सदैव से “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयः” जैसे सार्वभौमिक विचारों का संवाहक रहा है। इस विचार को मूर्त रूप देने के लिए चित्तौड़ प्रांत में भी विश्व संवाद केंद्र संवाद, विमर्श और प्रचार-प्रसार के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
विश्व संवाद केंद्र की स्थापना का विचार श्री रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान हिंदुत्व जागरण से जुड़े समाचारों के समुचित प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता से उत्पन्न हुआ। इसी भाव को आगे बढ़ाते हुए, चित्तौड़ प्रांत में भी संवाद, विचार, विमर्श और सूचना की स्वस्थ परंपरा को पोषित करते हुए यह केंद्र सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

हमारा कार्य (चित्तौड़ प्रांत)

  • चित्तौड़ प्रांत के भौगोलिक क्षेत्र में संवाद कार्य को विस्तार देना तथा जिला व नगरीय स्तर तक इसकी सशक्त उपस्थिति स्थापित करना।
  • भारतीय चिंतन परंपरा, सांस्कृतिक अवधारणाओं और यथार्थ बोध पर केंद्रित संवाद, लेख, विमर्श व साहित्य का प्रकाशन।
  • समाजोपयोगी व कल्याणकारी सेवा कार्यों को मीडिया के माध्यम से जनसामान्य तक पहुँचाना।
  • राष्ट्र और समाज से जुड़े विषयों पर गोष्ठियों, सेमिनारों, संवादों व विचार-विमर्श का आयोजन।
  • “संवाद-मंथन” नामक साप्ताहिक फीचर सेवा के माध्यम से छोटे व मंझोले समाचार पत्रों, सामाजिक संगठनों एवं राष्ट्रवादी लेखकों तक सूचनाओं की पहुँच।
  • प्रांत स्तर पर संदर्भ ग्रंथालय व डिजिटल ई-लाइब्रेरी की स्थापना की योजना।
  • नवोदित पत्रकारों, लेखकों और संवादकों को प्रशिक्षित करना एवं उनमें राष्ट्रहित व समाज चेतना को जाग्रत करना।