वर्तमान युग सूचना क्रांति का युग है। सूचना और संचार केवल व्यक्तित्व निर्माण ही नहीं, अपितु राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का भी अभिन्न अंग बन चुके हैं। ऐसे में एक ओर जहां भारतीय समाज को सशक्त सूचना तंत्र की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर पाश्चात्य सांस्कृतिक प्रभावों के कारण मूल भारतीय जीवन-मूल्यों पर खतरा भी बना हुआ है।
भारत सदैव से “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयः” जैसे सार्वभौमिक विचारों का संवाहक रहा है। इस विचार को मूर्त रूप देने के लिए चित्तौड़ प्रांत में भी विश्व संवाद केंद्र संवाद, विमर्श और प्रचार-प्रसार के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
विश्व संवाद केंद्र की स्थापना का विचार श्री रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान हिंदुत्व जागरण से जुड़े समाचारों के समुचित प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता से उत्पन्न हुआ। इसी भाव को आगे बढ़ाते हुए, चित्तौड़ प्रांत में भी संवाद, विचार, विमर्श और सूचना की स्वस्थ परंपरा को पोषित करते हुए यह केंद्र सक्रिय भूमिका निभा रहा है।