विकसित भारत 2047 की संकल्पना-40
अजेय सुरक्षा तंत्र-1
इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिसने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था की उपेक्षा की, वह व्यक्ति हो, परिवार हो, समाज हो अथवा राष्ट्र, वे पराजित होकर मिट जाते हैं।
यह बात भारत के ऊपर तो बार-बार लागू हुई है और केवल बाहर के विदेशी आक्रांताओं से ही नहीं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को भी जो देश सुदृढ़ नहीं बनाते, वह अत्यंत कठिनाइयों का सामना करते हैं। फिर स्वयं का आयुध निर्माण करना, सुरक्षा के साथ-साथ अपनी अर्थव्यवस्था के लिए भी उत्तम नीति है।
किसी भी गांव, समाज और राष्ट्र का बल कितना है, उसकी सुरक्षा व्यवस्था तंत्र कैसा है, उसी के आधार पर वह सम्मान पाता है। इस भौतिक विश्व में “जिसकी लाठी, उसी की भैंस” वाली कहावत सर्वथा चरितार्थ होती है।
प्राचीन इतिहास से लेकर दोनों विश्व युद्ध और अभी वर्तमान तक यह अनुभव आ रहा है कि आपकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी हो, आपका दृष्टिकोण, जनसंख्या बहुत अच्छी हो, किंतु सुरक्षा व्यवस्था तंत्र यदि सुदृढ़ नहीं है तो शेष सब कुछ नष्ट हो जाता है।
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