विकसित भारत 2047 की संकल्पना-44

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अजेय सुरक्षा तंत्र-5
भारत में बढ़ता आयुद्ध विनिर्माण:
Increasing Manufacturing of Armaments in Bharat…

वर्ष 2013-14 के बाद से भारत ने मेक इन इंडिया के अंतर्गत तेजी से काम किया है। वर्ष 2013-14 में हमारा आयुद्ध निर्यात (Armament Export) केवल 600 करोड रुपए का था, जो अब बढ़कर 16 हज़ार करोड़ रूपये का हो गया है और भारत सरकार ने 2025 तक इसका लक्ष्य 35 हज़ार करोड़ रूपये तक का रखा है।

अभी डीआरडीओ व एचएएल (DRDO & HAL) भारत के प्रमुख शोध व निर्माता तंत्र हैं लेकिन भारत ने इस विषय में बड़ी प्राइवेट कंपनियों को भी यह कार्य दिया है। जैसे- एलएनटी, महिंद्रा एंड महिन्द्रा, भारत फोर्ज, टाटा आदि। इन कपनियों ने वैश्विक आयुद्ध निर्माता कंपनियों के साथ अनुबंध करके तीव्रता से भारत में निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ की है। और इसी का परिणाम है कि आज 80 देशों में भारत निर्यात कर पा रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात वियतनाम को हुआ है और तेजस विमान भी विश्व बाजार में विक्रय को तैयार है।

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