विकसित भारत 2047 की संकल्पना-41
अजेय सुरक्षा तंत्र-2
हम लंबे समय तक विश्व की 32-33 प्रतिशत तक उत्पादन करने वाली अर्थव्यवस्था रहे हैं। किंतु सातवीं-आठवीं शताब्दी में जब विदेशी आक्रांताओं ने हम पर आक्रमण करने प्रारंभ किये और हमारी सुरक्षा व्यवस्था, जो पहले कभी अत्यंत मजबूत होती थी, वह कमजोर पड़ गई। उसका परिणाम यह हुआ कि भारत को एक हज़ार वर्ष तक अपनी स्वतंत्रता बचाने हेतु संघर्ष करना पड़ा।
मंगोल, पठान, तुर्क, मुगल, बाद में पुर्तगाली, फ्रेंच और अंग्रेज लगातार इस देश पर आक्रमण करते रहे और उसमें काफी सफलताएं भी प्राप्त करते रहे। क्योंकि तत्समय हमने अपनी अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था खड़ी नहीं की।
किन्तु भारत ने अब इतिहास से समझ ले ली है। इसलिए वर्ष 2047 की ओर बढ़ते हुए भारत का न केवल सुरक्षा तंत्र अजेय होना चाहिए, बल्कि विश्व में कहीं पर भी शांति स्थापित करने के लिए आवश्यक सामर्थ्य भी भारत के पास होना चाहिए।
पोखरण-2 के विस्फोट ने भारत को विश्व पटल पर एक बड़ी शक्ति के नाते से स्थापित किया, यह सत्य है और गत 15-20 वर्षों में हमने इस विषय में अच्छी प्रगति भी की है, किंतु यहां यह ध्यान रखने वाली बात भी है कि वर्तमान विश्व व्यवस्था में सुरक्षा तंत्र अकेले कार्य नहीं करता, बल्कि विभिन्न वैश्विक, आर्थिक नीतियां और वैश्विक व्यापार नीतियां, तीनों समग्र रूप से चलती हैं। वैश्विक अर्थनीति, वैश्विक व्यापार नीति व वैश्विक सुरक्षा नीति इनके समन्वित प्रयास से ही भारत अभेद्य बनेगा।
वर्तमान समय में भारत पर आंतरिक और बाहरी बड़ी चुनौतियां हैं। यद्यपि भारत ने आंतरिक आतंकवाद पर विगत 10-12 वर्षों में अच्छी तरह से नियन्त्रण पाया है। किंतु सीमा पर पाकिस्तान और चीन ही नहीं उसके अतिरिक्त भी देश हैं, जहां से भारत को सुरक्षा चुनौतीयां मिलती रहती है। इस परिदृश्य को ध्यान में रखकर हमें आगामी नीतियां बनानी होगी।
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