नेताजी सुभाषचंद्र बोस की विश्वस्त डाक्टर लक्ष्मी सहगल।
आजाद हिन्द फौज में बनाई थी महिला ब्रिगेड।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की चौथी धारा आजाद हिन्द फौज की है। यहाँ भी एक अद्भुत डाक्टर का नाम उल्लेखनीय है जिन्होंने रानी लक्ष्मी बाई ब्रिगेड बनाई और अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिये पाँच सौ महिलाओं को भर्ती किया। इनमें अधिकांश महिलाओ ने अपने प्राणों का बलिदान दिया।
उनका जन्म 24 अक्टूबर 1914 को तमिलनाडू के एक परंपरागत परिवार में हुआ। उन्होंने बचपन से अंग्रेज सैनिकों और अफसरों द्वारा भारतीयों का शोषण देखा इससे स्वाधीनता के लिये कुछ करने का भाव मन में जागा। बचपन से छोटी बड़ी सामाजिक गतिविधियों में लेते हुये मद्रास मेडिकल कालेज से डाक्टर की उपाधि प्राप्त की और सिंगापुर चलीं गईं। जहाँ 2 जुलाई 1943 को उनकी भेंट नेताजी सुभाषचंद्र बोस से हुई।
डॉ. लक्ष्मी उनके विचारों से बहुत प्रभावित हुईं और एक घंटे की भेंट के बाद ही वे आजाद हिन्द फौजसे जुड़ गईं और आजाद हिन्द फौज में ‘रानी लक्ष्मीबाई रेजीमेंट’ अस्तित्व में आ गई। 22 अक्तूबर, 1943 में डॉ. लक्ष्मी इस रेजिमेंट में ‘कैप्टन’ बनीं और फिर उन्हें ‘कर्नल’ का पद भी मिला, जो एशिया में किसी महिला को पहली बार मिला था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब आजाद हिन्द सरकार बनाई तो उसमें डॉ. लक्ष्मी पहली महिला केबिनेट सदस्य बनीं। द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद वे बंदी बना लीं गईं परन्तु 1947 में भारत की स्वतंत्रता की तैयारी के बीच ही वे रिहा हो गयीं । 1947 में विवाह करके वे कानपुर आ गईं और जीवन भर कानपुर में रहीं। 23 जुलाई 2012 को 98 वर्ष की आयु में उन्होंने संसार से विदा ली।

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