गीत-
है जिनका विश्वास
संघ किरण घर -घर पहुंँचेगी ,
है जिनका विश्वास।
इसी भाव से लगे हुए हैं,
कितने दुर्गादास।।
ऊँची शिक्षा दीक्षा लेकर,
छोड़ दिए घर -बार।
भारत माँ की सेवा करनी,
मार्ग किया स्वीकार।।
सत्य स्वयंसेवक बनने का,
पूर्ण किया अरमान।
रोम -रोम में बसा हुआ हैं,
जय- जय भारत गान।।
मुख ऊपर मुस्कान देख लो,
जीने का उल्लास।
संघ किरण घर घर पहुंँचेगी,
है जिनका विश्वास।।१।।
२
केशव पथ के अनुगामी ये,
माधव की पहचान।
वीर शिवा महाराणा के,
लगते हैं प्रतिमान।।
गुरु पुत्रों की कुर्बानी का ,
हर पल इनको ध्यान।
खड़े हुए हैं मोहन देखो,
लेकर गीता ज्ञान।।
हर संकट से लड़ना आता,
ले नूतन अहसास।
संघ किरण घर- घर पहुँचेगी,
है जिनका विश्वास।।२।।
३
साधारण है ताना बाना ,
मन से पूरे संत।
सूर कबीरा तुलसी इनमें,
और निराला पंत।।
रामकृष्ण गौतम का चिंतन,
पूर्ण विवेकानंद।
भारत माँ का अर्चन पूजन,
देता है आनंद।।
देश- धर्म की रक्षा करते ,
कर लेते वनवास।
संघ किरण घर- घर पहुंँचेगी,
है जिनका विश्वास।।३।।
४
संकल्पों में जीने वाले,
राग मोह से दूर।
अँधियारों से लड़ते निश दिन,
उजियारो से पूर।।
माया के बंधन तो उनको,
लगते मकड़ी जाल।
नित्य साधनारत है योगी,
कालों के भी काल।।
एक ध्येय बस है जीवन का,
न हो कोई उदास।
संघ किरण घर-घर पहुंँचेगी,
है जिनका विश्वास।।४।।
विष्णु शर्मा ‘हरिहर,
मौलिक तथा अप्रकाशित