भारत विकास परिषद: छह दशकों का सेवा आंदोलन: भाग-2

भारत विकास परिषद के
64 वें स्थापना दिवस पर विशेष

लेखक: विक्रांत खंडेलवाल, क्षेत्रीय संगठन मंत्री , भारत विकास परिषद

भारत विकास परिषद में सेवा शब्द का प्रयोग बहुदा देश सेवा समाज सेवा से आगे बढ़कर मानव सेवा तथा प्राणी मात्र की सेवा तक संदर्भ होता है । इन सेवा कार्यों में यदि तनिक भी कामना आ जाती है तो उसमें से पवित्र सेवाभाव निकल जाता है । परिषद की मान्यता है कि नि:स्वार्थ सेवा से अच्छे संस्कार उत्पन्न होते हैं । इसलिए व्यक्तिगत मोक्ष प्राप्ति कि अपेक्षा ना करते हुए सेवा और परोपकार करते हुए जीना श्रेयकर है । भारत विकास परिषद की मूल प्रकृति “सेवा संगठन” की है इसी आयाम के अंतर्गत भारत विकास परिषद द्वारा देशभर में पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा,स्वावलंबन के क्षेत्र में 4300 से अधिक कार्यो का संचालन किया जा रहा है । प्रमुख रूप से देश भर में 13 दिव्यांग केन्द्रो का संचालन किया जाता है जिसके माध्यम से आज तक लगभग 300000 दिव्यांगों की सहायता दी जा चुकी है । भारत विकास परिषद द्वारा चलाए जा रहे उल्लेखनीय केंद्र है :- भारत विकास परिषद अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, कोटा, भारत विकास परिषद मेडिकल सेंटर ,चंडीगढ़ ,भारत विकास परिषद दिव्यांग पुनर्वास केंद्र एवं संजय आनंद विकलांग अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, पटना, दिव्यांग सहायता केंद्र, दिलशाद गार्डन दिल्ही, विवेकानंद आरोग्य केंद्र, गुरुग्राम ,डॉक्टर सूरज प्रकाश आरोग्य केंद्र ,फरीदाबाद , श्री सुमतिनाथ सेवा सदन ,लखनऊ में संचालित पैथ लैब,न्यूरोथेरेपी सेंटर,होम्योपेथी चिकित्सा केंद्र ,भारत विकास परिषद् चैरिटेबल फ़िजियोथेरेपी सेंटर जयपुर आदि के साथ साथ भारत विकास परिषद द्वारा अपने सेवा प्रकल्प के अंतर्गत समग्र ग्राम विकास योजना,बनवासी सहायता, सामूहिक सरल विवाह, पर्यावरण, शिक्षा सहायता ,एनीमिया मुक्त भारत ,आत्मनिर्भर भारत ,महिला स्वावलंबन आदि के माध्यम से देश भर में शिक्षा स्वास्थ्य स्वावलंबन एवं सामाजिक विषय पर कार्य करने वाले कुल 1680 स्थाई सेवा प्रकल्पों का संचालन किया जा रहा है ।

भारत विकास परिषद के द्वारा अपने कार्यों के प्रचार प्रसार एवं संस्कार आयाम के अंतर्गत विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन भी किया जाता है । परिषद के द्वारा मुख्य रूप से “नीति” पत्रिका का प्रकाशन 1988 से किया जा रहा है जो कि हमारे प्रत्येक सदस्य परिवार (65000) तक नि:शुल्क रूप से डिजिटल रूप में प्रतिमाह प्रेषित की जाती है । हमारी त्रेमासिक “ज्ञान प्रभा” वैचारिक पत्रिका हमारे विचारों के माध्यम से सामाजिक जागरण का आधार है । साथ ही भारत विकास परिषद की “भारत को जानो” “चेतना के स्वर” सहित अनेक पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन समय-समय पर आवश्यकतानुसार किया जाता है । वर्तमान समय की आवश्यकता अनुसार अपने विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए भारत विकास परिषद अपने सोशल मीडिया ,मीडिया माध्यमों का भी पूर्ण रूप से सदुपयोग करती है । भारत विकास परिषद की प्रभावी सामाजिक उपस्थिति एवं प्रभाव के नाते हमारे कार्यक्रमों कि उपलब्धियां है कि भारत विकास परिषद के विभिन्न कार्यक्रमों में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा, ज्ञानी जैलसिंह, डॉक्टर वीवी गिरी, डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ,श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, रामनाथ कोविंद जी तथा प्रधन्मन्त्री श्री मनमोहन सिंह उपस्थित हो चुके है अथवा वो परिषद को विभिन्न कार्यो के लिए पुरस्कृत कर चुके हैं ।

इस वर्ष 10 जुलाई को भारत विकास परिषद अपनी स्थापना के सातवें दशक में यात्रा कर रही है । यह समय परिषद के लिए अपनी छह दशकों की यात्रा पूर्ण कर के सातवें दशक में प्रवेश करने का है आत्मावलोकन का है । आगामी दशक में भारत विकास परिषद “उभरते भारत” में प्रभावी उपस्थिति दर्ज करवाने को तैयार हो रहा है । आगामी दशक में परिषद की सदस्यता दो लाख परिवारों तक लेकर जाने का हमारे राष्ट्रीय महामंत्री ने आव्हान किया है । देश के प्रत्येक जिला केंद्र तक शाखा पहुंचाना, बड़े स्तर पर संगठन का वैचारिक साहित्य तैयार करना, अपने कार्यों में स्थाई सेवा प्रकल्पो की संख्या बढ़ाना एवं उनका प्रभावी संचालन करना ,अपने कार्यक्रमों में तकनीकी का उपयोग करते हुए समय अनुकूल बदलाव लाकर अपने संकल्पों को प्रभावी ढंग से पूर्ण करना है ।

भारत विकास परिषद में महिलाओं, युवाओं को नेतृत्व विकास का अवसर देते हुए उनको संगठन की निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाना ताकि हमारा भारत विकास परिषद दुनिया में भारत माता को परम वैभव पर ले जाने के अपने लक्ष्य को पूर्ण करने में अपना प्रभावी योगदान दे सकें ।
इस वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण हो रहे है इस वर्ष में हम सभी लोग मिल कर सामाजिक परिवर्तन के पंच सूत्र यथा पर्यावरण,स्वदेशी,समरसता, परिवार प्रबोधन एवं नागरिक कर्तव्यों का जागरण विषयों पर साहित्य निर्माण, संगोष्ठियां, प्रतियोगिताएं आदि प्रभावी कार्य करेंगे । परिषद् अपने संस्कार आयाम के अंतर्गत सबसे पहले अपने सदस्य परिवार ,विद्यार्थियों तथा परिवारों के माध्यम से पंच परिवर्तन के विषयों को घर घर तक पहुंचाएगी ।
भारत माता की जय !

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