पारसोला में जनजाति स्वाभिमान के लिए बलिदान हुए संघ कार्यकर्ताओं का स्मरण

36 वर्ष पूर्व पुलिस फायरिंग में 2 कार्यकर्ता की मृत्यु व 1 गंभीर घायल हुए, दर्जनों गिरफ्तार

जनजाति महिला को रफीक शाह अगवा कर ले गया था, विरोध में प्रदर्शन का हुआ था आयोजन

धरियावद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के इस वर्ष विजयादशमी को 100 वर्ष पूर्ण होने जा रहे है। संघ कार्य के विस्तार, राष्ट्र एवं समाज के लिए समर्पण और जनजागरण अभियानों की चर्चा कर रहे है। इसी क्रम में 6 अगस्त 1989 को
तत्कालीन बांसवाड़ा जिले के धरियावद क्षेत्र (वर्तमान प्रतापगढ़) के पारसोली में जनजाति महिला के अपहरण केस में कार्रवाई ना होने के विरोध में लगभग 2 हजार की संख्या में प्रदर्शन हुआ, जिसमें उपस्थित जनता पर पुलिस द्वारा फायरिंग की घटना हुई। गोली लगने से कार्यकर्ता श्रवण सेन व गौतम मीणा बरोड़ की मृत्यु हो गई। सुन्दर लाल पालीवाल के रीढ़ की हड्डी पर गोली लगने से कमर के नीचे का शरीर जीवनभर के लिए लकवाग्रस्त हो गया था।

36 वर्ष पूर्व की घटना है, जब पारसोली क्षेत्र में संघ कार्य गति से चल रहा था। कार्यकर्ताओ की अच्छी टोली से समाज में सामाजिक, सांस्कृतिक व राष्ट्रीय संदर्भ में सकारात्मक वातावरण का निर्माण हुआ था। तब सुन्दर लाल पालीवाल जल संसाधन (सिंचाई) विभाग में कनिष्क अभियंता जाखम सिंचाई परियोजना पर कार्यरत थे। वे संघ दृष्टि से प्रतापगढ जिले में जिला शारीरिक प्रमुख के दायित्व पर थे। उनके साथ कार्यक्षेत्र में नहरों के काम में ठेकेदार के साथ आदीवासी समाज के मजदूर कार्य करते थे। तब उन्हे सुचना मिली कि लेबर परिवार से आदीवासी लड़की पूंजकी मीणा को मुस्लिम युवक रफीक शाह पुत्र छोटे शाह ने अगवा कर लिया। लड़की के परिजन ने ठेकेदार व अभियंता सुन्दर लाल के साथ पारसोला थाने में जाकर रिपोर्ट दर्ज करवाई। कुछ दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने ना तो आरोपी को गिरफ्तार किया और ना ही लड़की को दस्तयाब किया। ऐसे में नाराज आदीवासी समाज के प्रमुख लोगों के साथ सुन्दर लाल थानाधिकारी कैलाश दिक्षित से मिले और रविवार 6 अगस्त तक लड़की को दस्तयाब नहीं करने पर धरना प्रदर्शन की बात कही।

पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो नियत दिन को आसपास क्षेत्र से लगभग 2 हजार लोग पारसोला थाने के सामने जूट गये। तब पारसोला नया तालाब के लिए निकले सुन्दर लाल थाने की तरफ एकत्रित लोगों से बातचीत करने के लिए रूके। सुंदरलाल के आते ही पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। जैसे पुलिस उन्ही की प्रतीक्षा कर रही हो। भीड़ तीतर-बीतर हो गई। जब सुन्दर लाल साथियों से बात करने लगे कि पुलिस ने बिना कोई चेतावनी के 46 राउंड फायरिंग कर दी। एक गोली सिंचाई विभाग के मुंशी श्रवण सेन की आंत में लगी, जो सुन्दर लाल के साथ आये थे। यह देखते ही सुन्दर लाल उसे संभालने के लिए दौड़े। अगली गोली सुन्दर लाल को लक्ष्य बनाकर चलाई जो उनके कमर के निचले हिस्से में मांस को बिखेरते हुए रीढ़ की हड्डी को चोटिल करती हुई निकली।

2 की मृत्यु, पुलिस ने श्रवण की अंत्येष्टि की, परिजनों ने मुआवजा ठुकराया
एक गोली वही मौजूद शक्करकंद के कुण्डी फलां निवासी गौतम मीणा बरोड़ को लगी। उसकी घटनास्थल पर ही मृत्यू हो गई। कुछ लोग गंभीर घायल श्रवण सेन को तुरंत उदयपुर लेकर निकले, लेकिन रास्ते में मृत्यू हो गई। अनेक निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर थाने ले जाकर बेरहमी से पीटा गया। माहौल इतना भयग्रस्त हो गया कि लोग पारसोला से 22 किमी धरियावद तक पैदल भागे। कहा जाता है कि उदयपुर लाये गये श्रवण सेन का शव परिजनों को तक नहीं सौंपा गया और प्रशासन ने उदयपुर-सलुम्बर मार्ग पर केवड़े की नाल में ही अंतिम संस्कार कर दिया। परिणामस्वरूप श्रवण के परिजनों ने समाज व शासन से किसी भी तरह की क्षतिपूर्ति सहयोग राशि स्वीकार करने से मना कर दिया।

पारसोला के रघुनन्दन शर्मा बताते है कि एक अन्य गाड़ी से सुन्दर लाल को प्राथमिक चिकित्सा के लिए पहले पारसोला, फिर धरियावद चिकित्सालय और महाराणा भूपाल चिकित्सालय उदयपुर लाया गया। लैंडलाइन फोन से इंजिनियरिंग यूनियन के लोगों को सुचना मिली तो वे भी उदयपुर चिकित्सालय पहुंचे। अनेक संघ के कार्यकर्ता भी हॉस्पिटल पहुंचने लगे। डॉक्टर को आश्चर्य हुआ कि 4 घंटे तक रक्तस्राव होने के बावजूद सुन्दर लाल जीवित थे।

सेवानिवृत्त अभियंता पीयूष जोशी सुन्दर लाल की मजबूत इच्छाशक्ति को बताते हुए कहते है कि वे जब हॉस्पिटल में मिले तो उन्हे कहा कि कोई विशेष बात नहीं। उपचार होकर ठीक हो जायेगा। तब मेडिकल साइंस इतनी एडवांस ना होने और उदयपुर में तो न्यूरोलॉजी के ऑपरेशन की इतनी सुविधा भी नहीं थी। घटना के 48 घंटे में ऑपरेशन हो जाता तो सुन्दर जीवन भर की तकलीफ नही पाते। सवाई मानसिंह चिकित्सालय व सफदरजंग चिकित्सालय दिल्ली में महिनों तक उपचार चला। उनका कमर से नीचे तक का शरीर लकवाग्रस्त हो गया। वे तब से 9 मई 2021 में मृत्यू तक तक व्हील चेयर पर रहे। तब भी उसी हौसले, जज्बे व जुझारूपन से काम करते रहे। कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति उनके पास सहयोग की अपेक्षा से जाता , तो अपने संपर्क से उसका सहयोग करते।

राजनीतिक द्वेष से लक्षित गोलीबारी
लगातार 13 वे स्थानांतरण से पारसोला पहुंचे सुन्दर लाल व स्वयंसेवक टोली की सक्रियता के कारण इस क्षेत्र में संघ का प्रभाव फैल रहा था। नवयुवकों की बड़ी टोली बन गई थी। यह बात स्थानीय दबंग नेताओं को लंबे समय से अखर रही थी। संघ कार्यकर्ता उनकी हिट लिस्ट में थे। यह धरने-प्रदर्शन के दौरान उन्हे मौका मिला और पुलिस से लक्षित गोली चलवाई गई। तब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बी एन योगेश्वर, उपखंड अधिकारी निरंजन प्रसाद शर्मा, थानाधिकारी कैलाश दीक्षित, एएसआई अमर पूरी गोस्वामी की भूमिका संदेह में रही। कूछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तत्कालीन प्रधान भी वहां मौजूद थे।

गोलीबारी के एक दिन बाद जयपुर से भैरोंसिंह शेखावत, हरिशंकर भाभड़ा, किरोड़ी लाल मीणा, गुलाब चंद कटारिया जैसे दिग्गज नेता पारसोला पहुंचे। स्थानीय लोगों ने 45 दिन तक धरना चलाया, जो गिरफ्तार लोगों को जमानत मिलने पर समाप्त हुआ।

आपातकाल के विरुद्ध जेल गये, लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओ का दमन
बड़गांव के पूर्व सरपंच कैलाश बताते है कि स्वर्गिय सुन्दर लाल ने आपातकाल में भूमिगत रहते हुए आमजन को जागरूक करने का कार्य किया। संघ द्वारा एक पत्रक ‘चिंगारी’ प्रकाशित होता था। सुन्दर लाल देर रात्रि को कार्यकर्ताओ के साथ मिलकर वह पत्रक अशोक नगर, भुपालपुरा, पोलो ग्राउण्ड आदि क्षेत्रों के घरों में डाल दिया करते थे। चिंगारी पत्रक उद‌यपुर के कुम्हारवाड़ा की प्रेस में छपता था। वहां पुलिस ने छापा डाल दिया। वहां मौजूद सुन्दर लाल व अन्य स्वयंसेवकों को मीसा कानून के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया। उद‌यपुर केन्द्रीय कारागार में रहते हुए सुन्दर लाल ने अन्य साथियों के साथ मिलकर महादेव मंदिर बनाया, जो आज संघेश्वर महादेव नाम से जाना जाता है।

जेल में अध्ययन, राजकीय सेवा में चयन
जेल में रहते हुए ही सुन्दर लाल ने सिविल डिप्लोमा की पूरीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की। आपातकाल के अंतिम समय तक सरकार से माफी नहीं मांगी। जिसके कारण कई स्वयंसेवकों के साथ लगभग डेढ़ वर्ष तक जेल में रहे। आपातकाल के बाद ही जेल से रिहा किए गए। जेल से रिहा होने के बाद आप सिंचाई विभाग में कनिष्ठ अभियंता के पद पर राजकीय सेवा में चयनित हुए। राजकीय सेवा में रहते हुए भी संघ कार्यों को नहीं छोड़ा। जहाँ भी पोस्टिंग होती, वहीं संघ कार्य शुरू कर देते।

व्हीलचेयर से सामाजिक सक्रियता
लकवा हो जाने के बावजूद सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे। उनके भाई हमेशा के लिए तत्पर रहे। संघ कार्यालय राजसमंद के लिए भूमि संबंधित रजिस्ट्री संबंधित कामकाज के लिए परिजनों के साथ तहसील तक आते-जाते थे। अनेक कार्यकर्ता आनंदित होने या मन कमजोर होने पर सुन्दर लाल के साथ बैठकर खुलकर बात रखते। एक मार्गदर्शक के रूप में कार्यकर्ताओ का निर्माण राजसमंद में भी जारी था। राष्ट्र के लिए व्यक्ति निर्माण की आदर्श पाठशाला बनकर स्थापित हुए।

राजसमंद में शताब्दी वर्ष में होगा सुन्दर स्मृति व्याख्यान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 की विजयादशमी को हुई। संघ को विश्व को सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन इस यात्रा में अनेक लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया है। समाज में संगठन व सद्भाव का वातावरण बनाने और उनसे जुड़े विषय चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राम मन्दिर आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन, सामाजिक समरसता जनजागरण, जनजाति क्षेत्र में शिक्षा व स्वास्थ्य का प्रसार, अनुच्छेद 370 के उन्मूलन जैसे अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान रहा। राजसमंद इस माह में सुन्दर स्मृति व्याख्यान के बैनर तले “त्वदीयाय कार्याय बद्धाय कटियम” विषयक व्याख्यान आयोजित होगा।

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