सदियों तक चली घुसपैठी आक्रमणकारियों के विरुद्ध भारतीय प्रतिरोध की गाथा:- 9

रानी चेन्नम्मा-1 
केलाड़ी की रानी जिन्होंने मुगलों का सामना किया, छत्रपति शिवाजी के पुत्र को शरण दी... 

रानी चेन्नम्मा, जिला शिमोगा (कर्नाटक) के केलाड़ी के राजा सोमशेखर नायक की पत्नी थीं। केलाड़ी साम्राज्य को बैदनूर और इक्केरी भी कहा जाता है।
केलाड़ी राजवंश दक्षिण भारत का बलशाली और पराक्रमी राजवंश रहा है।

रानी चेन्नम्मा का विवाह सन् 1667 में हुआ था। सन् 1677 में राजा सोमशेखर की मृत्यु के पश्चात चेन्नम्मा ने राज्य की बागडोर अपने हाथों में ले ली।
उन्होंने 19 वर्ष तक बहुत बुद्धिमत्ता और नीतिपूर्वक राज किया।

अपने राज्यकाल के दौरान उन्होंने कई युद्ध लड़े और जीते। मुगल बादशाह औरंगजेब की सेना के साथ भी उनका भीषण युद्ध हुआ था, अंततोगत्वा मुगलों को ही पीछे हटना पड़ा, और रानी चेन्नम्मा के साथ उन्हें संधि भी करनी पड़ी।
रानी चेन्नम्मा ने बीजापुर के सुल्तान और मैसूर के राजा को भी पराजित किया था।

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